कप्तान साहब! थानेदार खेल रहे खेल पत्रकार को जांच से पहले ही भेजा जेल


तफ्तीश

उत्तर प्रदेश में पत्रकारों के लिए आगे कुआं पीछे खाई की स्थिति उत्पन्न हो गई है। यदि वह अपराधियों का सच दिखाएं तो जान का खतरा और यदि वह पुलिस की सच्चाई दिखाएं तो जेल जाने का खतरा। ऐसा ही मामला पत्रकारों के उत्पीड़न के लिए मशहूर जिला मिर्जापुर का है जहां कुछ माह पूर्व प्राथमिक विद्यालय में मध्यान्ह भोजन में नमक रोटी खिलाए जाने  का मामला पत्रकार ने उजागर किया  तो तत्कालीन जिलाधिकारी अनुराग पटेल ने  पत्रकार के ऊपर मुकदमा कायम करा दिया और साहब ने मुकदमा कायम कराया था तो पुलिस वालों ने भी देरी नहीं की और अपनी कार्यवाही में लग गए। यहां भी थानेदार की जिद्द। अपनी पुरानी रंजिश निकालने के लिए एक मामले में बिना जांच के ही आनन-फानन में पत्रकार को जेल भेज दिया। मृतक के पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार इसलिए नहीं किया क्योंकि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद थाना प्रभारी के मंसूबों पर पानी फिर जाता । लिहाजा वरिष्ठ अधिकारियों को गुमराह करते हुए थाना प्रभारी ने मुकदमा पंजीकृत कर पत्रकार को जेल भेज दिया। जबकि सरकार द्वारा निर्देशित है कि पत्रकार के विरुद्ध यदि कोई शिकायत आती है तो उसकी जांच किसी वरिष्ठ अधिकारी से कराने के पश्चात उस पर कार्रवाई हो किन्तु जिला मिर्जापुर में पत्रकारों को जेल भेजने की इतनी जल्दी है कि सरकार के आदेश को अधिकारी जूते की नोक पर रखते हैं।

 

मिर्जापुर जिले के हलिया थाना क्षेत्र के खोदाईपुर गांव में बीते 23 जुलाई की शाम जमीन संबंधी विवाद को लेकर हुए मारपीट व वृद्ध की हुई मौत के मामले में अब एक नया मोड़ सामने आ गया है। तथ्यों की रोशनी में जो बातें सामने आ रही है उसमे हलिया थाना प्रभारी अमित सिंह की भूमिका संदेह के घेरे में है। इस मामले में संपूर्ण घटना की प्रारंभिक जांच हो जाए तो सब कुछ स्पष्ट हो जाएगा। महत्वपूर्ण बात तो यह है कि थाना प्रभारी हलिया सब कुछ जानने के बावजूद भी गलत तरीके से पत्रकार सत्यदेव द्विवेदी को जेल भेज दिया। बहरहाल पत्रकार की गिरफ्तारी सही हुई या गलत यह जांच बाद ही स्पष्ट हो पाएगा। पत्रकार सत्यदेव द्विवेदी की पत्नी रामदुलारी द्विवेदी ने 24 जुलाई को मिर्जापुर के एसपी डॉ धर्मवीर सिंह को जो प्रार्थना पत्र दिया है उसमें कई तथ्य चौकाने वाले है। पीड़िता का आरोप है कि पिछले 23 जुलाई को जमीन संबंधी विवाद को लेकर लालमणि दुबे व दिलीप दुबे के बीच मारपीट हुई थी। मारपीट के दौरान लालमणि दुबे का नाती दिनकर दुबे अपने दादा की लाइसेंसी बंदूक लेकर विरोधी दिलीप दुबे व प्रदीप दुबे को मारने के लिए दौड़ा। इसी दौरान लालमणि दुबे की वृद्ध पत्नी प्रभावती दुबे दौड़ कर नाती के हाथ से बंदूक छिनने लगी,इसी छीना झपटी में वह जमीन पर गिर पड़ी जिसके बाद वृद्ध को परिजन अस्पताल ले गए जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। पीड़ित महिला का आरोप है कि पूरा विवाद लालमणि दुबे व दिलीप दुबे के बीच था। मेरे परिवार के लोगों का दोष सिर्फ इतना ही था कि मेरे ट्रैक्टर चालक दिलीप दुबे मेरा ट्रैक्टर लेकर विवादित खेत की जुताई करने के लिए चले गए थे। पुत्रों को भी लालमणि दुबे के पक्ष के लोगों ने लाठी डंडे से मार कर घायल कर दिया था। महिला ने बताया कि घटना के दौरान मेरे पति लगभग पांच किलोमीटर दूर मेडिकल स्टोर पर थे। इसके बावजूद भी लालमणि दुबे ने मेरे पति व पुत्रों के खिलाफ मारपीट कर वृद्ध महिला को मार डालने का आरोप लगाकर हलिया थाने में मुकदमा दर्ज करवा दिया।जिसमें थाना प्रभारी ने मेरे पति को मेडिकल स्टोर से बुलवा कर गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। बड़ी बात तो यह है कि सीओ लालगंज भानु प्रताप कहते हैं कि वृद्ध प्रभावती देवी को न किसी ने मारा और न ही किसी ने ट्रैक्टर से कुचला है । वही हलिया थाना प्रभारी अमित सिंह कहते हैं कि वृद्ध की पिटाई से मौत हुई है। वैसे इस मामले में मिर्जापुर एसपी डॉ धर्मवीर सिंह ने जांच के आदेश दे दिए हैं। इस जांच से क्या होगा यह भविष्य के गर्भ में छिपा है ।थाना प्रभारी अपने पद पर बने हुए हैं लिहाजा जांच रिपोर्ट क्या आएगी यह पहले से ही निश्चित है।कई बार इस प्रकार के जांच के आदेश मामले को रफा-दफा करने के लिए भी दे दिए जाते हैं।